Faridabad/Alive News: जिले में औसत वर्षा 29. 80 मिलीमीटर दर्ज की गई है। इससे खरीफ की सभी फसलों को लाभ हुआ है। अब किसानों को एक सप्ताह तक धान की सिंचाई की आवश्यकता नहीं है। इससे भूजल संरक्षण होगा, वहीं बिजली – डीजल की खपत भी नहीं होंगी।
जिले में बुधवार की शाम से बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे तक सबसे ज्यादा वर्षा गौंछी उप तहसील में 60 मिलीमीटर और सबसे कम फरीदाबाद तहसील में पांच मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई। बल्लभगढ़ में 30 मिलीमीटर, तिगांव में 22 मिलीमीटर, मोहना में 18 मिलीमीटर, दयालपुर में 28 मिलीमीटर, धौज में 28 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। जिले में धान रोपाई का कार्य जोरों से चल रहा है। जिन खेतों में अभी तक धान रोपाई के लिए जलभराव नही किया गया । वर्षा से उन खेतों में भी जलभराव हो गया है। अब वह किसान सीधे धान की रोपाई कर सकते है। जिन किसानों ने धान की रोपाई कर दी है, उनके लिए वर्षा का यह पानी अमृत की तरह बरसा है।
वर्षा का पानी ठंडा और मीठा होता है। इस पानी से धान की फसल अच्छी होती है। जिन किसानों के ट्यूबवेलों का पानी खारा है, उनके धान को लाभ मिली है।
अब तक गर्मी में खारे पानी में नमक गर्म होने से फसल जली – जली सी हो रही थी। अब पुरी तरह से हरी – भरी दिखाई देंगी। जिन किसानों ने अभी तक बाजरा, दलहन, तिलहन की बुआई नहीं की है, वह इन फसलों की बोआई कर सकते है।
क्या कहना है किसानों का
हमने धान लगाई है और अभी लगा रहे है। धान के लिए वर्षा एक वरदान के रूप में हुई है। अब कम से कम हमें एक सप्ताह तक धान की रोपाई करने की आवश्यकता नहीं है।
- महेंद्र अग्रवाल
जैसी वर्षा फिलहाल हो रही है, इससे लगता है कि सावन की शुरुआत अच्छी हो गई है। ज्यादा से ज्यादा वर्षा होनी चाहिए, ताकि घटते हुए भुजल को बचाया जा सके। अभी तक तो किसी भी फसल में कोई नुकसान नहीं है।
- समय सिंह
क्या कहना है कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का
अब वर्षा का मौसम शुरू हो गया है। किसान अपने धान में खाद डाल सकते हैं। जो अभी तक धान की रोपाई नहीं कर पाए है वह अभी कर सकते है। जिन किसानों ने कपास की फसल लगाई है। और कपास के खेत में जलभराव हो गया है तो पानी को तुरंत निकाल दें। कपास में जलभराव से नुकसान हो सकता है।
- डा आनंद कुमार, कृषि विज्ञानी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग फरीदाबाद

