Faridabad/Alive News: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली की ओर से फतेहपुर बिल्लौच गांव में अस्पताल का निर्माण कार्य यूं तो सितंबर-2025 में बनाकर तैयार किया जाना था, पर किन्हीं कारणों से यह समय पर पूरा नहीं हो सका। अब इसका निर्माण नववर्ष तक पूरा होने की उम्मीद है। अस्पताल प्रबंधन ने चार कमरों को जल्द तैयार करके देने के लिए कहा है। ताकि डॉक्टरों को बैठाया जा सके। इससे ग्रामीण अंचल में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
एम्स को अस्पताल बनाने के लिए फतेहपुर बिल्लौच की पंचायत ने 2008 में नौ एकड़ भूमि दी थी। यहां पर एम्स ने 15 बिस्तरों का अस्पताल बनाने 20 करोड़ रुपये का बजट मंजूर कर दिया और सीपीडब्ल्यूडी को भवन बनाने का जिम्मा सौंप दिया। सीपीडब्ल्यूडी ने भवन बनाने का कार्य सितंबर-2024 में शुरू कर दिया। तब से लेकर अब तक अस्पताल का सिर्फ ढांचा बनकर तैयार हुआ है। यहां पर दो ओपीडी के लिए कमरे बनाए गए हैं।
चार डॉक्टरों के बैठने के लिए कमरे बनाए गए हैं। दो ओपीड़ी तैयार की गई हैं। फार्मेसी का कमरा बनाया गया है। सामान्य वार्ड बनाया गया है। अभी ढांचे पर प्लास्टर, खिड़की, शीशे लगाने कार्य चल रहा है। इसके बाद अस्पताल के उपकरण लगाए जाएंगे। अस्पताल में सेवा देने वाले डाक्टरों के लिए निवास भी बनाए जाने हैं।
आसपास गांवों को मिलेगा स्वास्थ्य लाभ
फतेहपुर बिल्लौच एक कस्बा है। गांव की आबादी 30 हजार है। गांव में एक भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। रात के समय गंभीर बीमार होने पर ग्रामीणों को बल्लभगढ़-फरीदाबाद के अस्पतालों में लेकर दौड़ना पड़ता है। एम्स का अस्पताल बनने से गांव के 30 हजार ग्रामीणों तथा आसपास के लढौली, पन्हैड़ा कलां, जवां, ककड़ीपुर, मांदकौल, शाहपुर कलां, डीग, प्रहलादपुर माजरा डीग के हजारों ग्रामीणों को घर के नजदीक अच्छी स्वास्थ्य सेवा मिलेंगी। डिलीवरी के लिए एंबुलेंस बुलाकर बादशाह खान या सेक्टर-तीन की रैफरल इकाई नहीं दौड़ना पड़ेगा।
एम्स ने अस्पताल बना दिया है, यह हमारे गांव के लिए बड़ी बात है। छह महीने भले और समय लग जाए। कम से कम ग्रामीणों को अच्छे डॉक्टरों से इलाज तो मिलेगा। यहां के डॉक्टर गंभीर स्थिति में सीधे दिल्ली एम्स में भर्ती करा सकेंगे।
-जगदीश गोयल, ग्रामीण

