October 3, 2026

ईएसआईसी अस्पताल में 1200 मरीजों का दबाव, डॉक्टर-नर्सिंग स्टाफ की कमी से व्यवस्था पर असर

Faidabad/Alive News: एनआईटी-3 स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके अनुपात में मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या नहीं बढ़ाई गई है। अस्पताल की मूल क्षमता 510 बेड की है, जिसे बढ़ाकर करीब 950 बेड तक किया गया है। वर्तमान में करीब 1200 मरीज भर्ती हैं। ऐसे में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर काम का दबाव बढ़ गया है।

अस्पताल में फरीदाबाद के अलावा दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, पलवल समेत आसपास के कई जिलों से रोजाना करीब 5 हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट, कैंसर उपचार, एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं शुरू होने के बाद दूसरे राज्यों से भी मरीज आ रहे हैं। अधिकारियों के निर्देश पर बेड बढ़ाए गए, ताकि मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर न करना पड़े। हालांकि, अतिरिक्त बेड के अनुरूप स्टाफ की व्यवस्था नहीं हो सकी।

आईसीयू में भी बढ़ा दबाव

अस्पताल में 50 बेड के आईसीयू की क्षमता बढ़ाकर करीब 120 बेड की गई है। स्टाफ की कमी के कारण नर्सिंग कर्मचारियों पर मरीजों की संख्या का दबाव बढ़ गया है। इससे मरीजों की देखभाल और कर्मचारियों के कामकाज दोनों पर असर पड़ रहा है।

150 डॉक्टर और 400 नर्सिंग स्टाफ की जरूरत

सूत्रों के अनुसार अस्पताल में करीब 400 डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि करीब 150 और डॉक्टरों की जरूरत है। वहीं मरीजों की संख्या के हिसाब से करीब 800 नर्सिंग स्टाफ होना चाहिए, जबकि वर्तमान में करीब 400 नर्सिंग कर्मचारी कार्यरत हैं।

 खानापूर्ति के लिए केवल झूठे आश्वासन देते है

अस्पताल अधिकारियों का कहना है कि ईएसआईसी मुख्यालय के महानिदेशक और वित्तीय आयुक्त को कई बार अस्पताल में डॉक्टर व पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की कमी से अवगत कराया जा चुका है। अनेक बार स्टाफ बढ़ाने की मांग के लिए पत्र लिख चुके हैं लेकिन खनापूर्ति के लिए केवल झूठे आश्वासन देकर चुप करावा दिया जाता है।

मुख्यालय से कई बार मांग के बावजूद नहीं बढ़ा स्टाफ  

अस्पताल में स्टाफ बढ़ाने के लिए कई बार मुख्यालय स्तर पर मांग उठाई गई। लेकिन मुख्यालय के महानिदेशक और वित्तीय आयुक्त के कांनू पर जूं तक नहीं रेंगती है। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगताना पड़ रहा है। श्रमिकों के वेतन से हर वर्ष करोड़ों रुपये कटने के बावजूद उन्हें बेहतर इलाज के लिए दर-दर ठोकरें खानी पड़ रही है।

 – बेचू गिरी, श्रमिक नेता

सीमित संसाधनों में बेहतर इलाज देने का प्रयास

हमारा प्रयास सीमित संसाधनों में मरीजों को बेहतर इलाज देने का है। इसके लिए वह प्रयासरत है। स्टाफ बढ़ाने के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा गया है। –

 – डॉ. कालीदास च्वहाण, डीन, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल