Faridabad/Alive News: मन में देशप्रेम का जज्बा और राष्ट्र के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो, तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं होता। इस कथन को सच कर दिखाया है संजय कॉलोनी निवासी देवेंद्र शर्मा ने, जिनका चयन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर हुआ है।
हाल ही में देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में आयोजित पासिंग आउट परेड एवं दीक्षांत समारोह में देवेंद्र शर्मा को लेफ्टिनेंट की उपाधि प्रदान की गई। उनके सेना में अधिकारी बनने की खबर से परिवार, गांव और संजय कॉलोनी में खुशी की लहर दौड़ गई।
फरीदाबाद पहुंचने पर लेफ्टिनेंट देवेंद्र शर्मा का संजय कॉलोनी वासियों द्वारा ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया गया। उन्हें खुली जीप में बैठाकर निवास तक ले जाया गया। इस दौरान वार्ड नंबर चार की पार्षद संगीता भारद्वाज के पति ज्ञानेन्द्र भारद्वाज, वार्ड नंबर पांच की पार्षद शीतल खटाना के पति एवं पूर्व पार्षद जयवीर खटाना, भाजपा मुजेसर मंडल के मीडिया प्रभारी दीपक पीलवान सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने नोटों की माला पहनाकर लेफ्टिनेंट देवेंद्र शर्मा का अभिनंदन किया।
इस अवसर पर पार्षद प्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने कहा कि देवेंद्र शर्मा की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और युवाओं के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत है। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए शुभकामनाएं दीं।
लेफ्टिनेंट देवेंद्र शर्मा के पिता रनवीर शर्मा, जो हरियाणा रोडवेज बल्लभगढ़ डिपो में निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं, ने कहा कि उनका परिवार हमेशा से देशसेवा के मार्ग पर विश्वास करता रहा है। देवेंद्र ने परिवार की इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया है। उन्होंने युवाओं से कड़ी मेहनत और लगन के साथ अपने सपनों को साकार करने का आह्वान किया।
वहीं लेफ्टिनेंट देवेंद्र शर्मा ने कहा कि वे देश की सेवा में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करेंगे और देश के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।
गौरतलब है कि देवेंद्र शर्मा की शिक्षा और प्रशिक्षण यात्रा भी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पलवल जिले के छोटे से गांव मढनाका में पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा और सैन्य प्रशिक्षण के लिए फरीदाबाद के एक प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण संस्थान में दाखिला लिया। कठोर प्रशिक्षण और चयन प्रक्रिया के दौरान उनकी शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और नेतृत्व कौशल की कड़ी परीक्षा हुई। निरंतर परिश्रम और समर्पण के बल पर उन्होंने यह सफलता हासिल की।

