March 7, 2026

फरीदाबाद-पलवल में भ्रष्टाचार पर शिकंजा, पिछले साल 29 कर्मचारी रंगे हाथों गिरफ्तार

Faridabad/Alive News: कानून लागू कराने वाली एजेंसियों में ही यदि भ्रष्टाचार के मामले सामने आएं, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। वर्ष 2025 में फरीदाबाद और पलवल जिलों में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कार्रवाई करते हुए कुल 29 कर्मचारी और अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इनमें सबसे अधिक संख्या पुलिसकर्मियों की रही।

पुलिसकर्मी सबसे ज्यादा पकड़े गए

ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार गिरफ्तार आरोपितों में आठ से अधिक पुलिसकर्मी शामिल थे। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग से तीन और राजस्व विभाग से दो कर्मचारी पकड़े गए। अन्य विभागों के भी एक-दो कर्मचारी कार्रवाई की जद में आए।पुलिसकर्मियों पर जमानत दिलाने में मदद, गिरफ्तारी से बचाने, चालान जल्द पेश कराने, एफआईआर दर्ज न करने या धाराएं जोड़ने-हटाने के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप सामने आते रहे हैं। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति लागू है और दोषी पाए जाने पर सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाती है।

राजस्व और नगर निगम भी जांच के दायरे में

राजस्व विभाग में इंतकाल दर्ज करने, जमीन से जुड़े रिकॉर्ड दुरुस्त करने और फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत मांगने की शिकायतें मिलती रही हैं। कई मामलों में बिचौलियों के माध्यम से लेन-देन किया गया। कुछ मामलों में पटवारियों के साथ उनके निजी सहायकों को भी गिरफ्तार किया गया। नगर निगम के कर्मचारी भी ब्यूरो की कार्रवाई से अछूते नहीं रहे।

ऑडियो रिकॉर्डिंग बन रही अहम सबूत

ब्यूरो अधिकारियों के मुताबिक अब शिकायतकर्ता लिखित शिकायत के साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध करा रहे हैं, जो साक्ष्य के रूप में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। टीम का प्रयास आरोपितों को रंगे हाथों पकड़ने का रहता है।

हालांकि कुछ मामलों में ट्रैप असफल होने पर केवल रिश्वत मांगने का केस दर्ज किया जाता है, लेकिन ऐसे मामले अपेक्षाकृत कम हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कई आरोपित पहले लोगों को दफ्तरों के चक्कर कटवाते हैं और बाद में मोटी रकम की मांग करते हैं।

साल-दर-साल गिरफ्तारी के आंकड़े

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में 15, 2019 में 9, 2020 में 7, 2021 में 14, 2022 में सर्वाधिक 42, 2023 में 29, 2024 में 23 और 2025 में 29 कर्मचारी-अधिकारी गिरफ्तार किए गए। वर्ष 2026 में अब तक दो गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।हालांकि अदालत में रिश्वत के आरोप साबित करना चुनौतीपूर्ण होता है, जिसके कारण कई मामलों में आरोपितों को बरी भी कर दिया जाता है।