March 7, 2026

संसद के सेंट्रल हॉल में संविधान दिवस कार्यक्रम शुरू: 9 नई भाषाओं में संविधान जारी, राष्ट्रपति संबोधन देंगी

National/Alive News: आज देशभर में संविधान दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर संसद के सेंट्रल हॉल में विशेष कार्यक्रम हो रहा है, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कर रही हैं।

कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और सभी सांसद शामिल हुए हैं। कार्यक्रम में आज संविधान को 9 नई भारतीय भाषाओं में जारी किया जाएगा। साथ ही संस्कृति मंत्रालय की स्मारिका “भारत के संविधान से कला और कैलिग्राफी” के हिंदी संस्करण का भी विमोचन किया जाएगा।

थोड़ी देर बाद लोकसभा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति भाषण देंगे, जिसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अभिभाषण देंगी और संविधान की प्रस्तावना पढ़ेंगी।

अब इन 9 भाषाओं में भी मिलेगा संविधान
संविधान को अब इन नौ भाषाओं में भी उपलब्ध कराया जाएगा—मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया। इससे लोगों को अपनी भाषा में संविधान पढ़ने और समझने में आसानी होगी।

लोकसभा अध्यक्ष ने संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि दी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि इस अवसर पर हम संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद, संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर और सभी सदस्यों को श्रद्धांजलि देते हैं।

उन्होंने कहा कि संविधान इसी पवित्र सेंट्रल हॉल में लंबी चर्चाओं और विचार-विमर्श के बाद तैयार हुआ और इसमें देश के नागरिकों के सपनों को शामिल किया गया।

ओम बिड़ला ने बताया कि पिछले 70 सालों में संविधान के मार्गदर्शन में देश ने सामाजिक न्याय, विकास, सुशासन और आर्थिक प्रगति में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।

संविधान दिवस समारोह में शीर्ष नेता हुए शामिल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई नेता इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।

भारत के संविधान की जड़ें पुराने कानूनों में भी कार्यक्रम में बताया गया कि भारत के संविधान में कई पुराने कानूनों और व्यवस्थाओं का भी प्रभाव शामिल है। विशेष रूप से 1923 की ग्वालियर रियासत की दरबार पॉलिसी, जिसे उस समय महाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम के मार्गदर्शन में बनाया गया था। इस पॉलिसी में भी सभी को समान अधिकार देने की बात थी।

आजादी के बाद जब देश का संविधान बनाया गया तो दरबार पॉलिसी के कई प्रावधानों को उसमें शामिल किया गया। ग्वालियर रियासत के कुछ कानून आज भी लागू हैं, जो उस समय की दूरदर्शी सोच को दर्शाते हैं।