March 7, 2026

कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक — समझिए फर्क और जानिए तुरंत क्या करना है

हम अक्सर टीवी पर या रोज़मर्रा की बातचीत में “हार्ट अटैक” और “कार्डियक अरेस्ट” शब्द एक दूसरे की जगह उपयोग कर देते हैं। पर चिकित्सकीय दृष्टि से ये दोनों अलग घटनाएं हैं और इनका तात्कालिक व्यवहार भी अलग होना ज़रूरी है। सही पहचान और समय पर सही कार्रवाई के बिना जानलेवा परिणाम हो सकते हैं; इसलिए समाज को इन अंतर और प्राथमिक आपात व्यवहारों की जानकारी होना अनिवार्य है।

क्या है फर्क?
हार्ट अटैक — यह एक सर्कुलेशन समस्या है: हृदय की मांसपेशी तक ब्लड सप्लाई अचानक कम या बंद हो जा सकती है (अक्सर रक्त वाहिका में थक्का बन जाने से)। इसके कारण हृदय के उस हिस्से को ऑक्सीजन नहीं मिलता और ऊतक क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। आम लक्षणों में छाती में दबाव/दर्द, सांस लेने में कठिनाई, पसीना, मतली या बाएं हाथ/कंधे/जबड़े में दर्द शामिल हैं पर लक्षण हर किसी में अलग दिखाई दे सकते हैं।

कार्डियक अरेस्ट यह एक इलेक्ट्रिकल समस्या है: दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है या अनियमित (फिब्रिलेशन) रूप में काम करने लगता है, जिससे रक्त प्रवाह तुरन्त रुक जाता है। व्यक्ति सामान्यतः तुरंत बेहोश हो जाता है और न पलक झपकाने पर न ही नब्ज़ मिलती है। कार्डियक अरेस्ट बहुत तेज़ी से घातक हो सकता है। कभी-कभी हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट को ट्रिगर कर सकता है।

त्वरित पहचान — संकेत क्या देखें
हार्ट अटैक के संकेत: लगातार या बार-बार होने वाला छाती में दबाव/तीव्रता, सांस फूलना, ठंडा पसीना, मिचली, पीठ/जबड़ा/बांह में फैलता दर्द। महिलाएं, वृद्ध और डायबिटिक रोगियों में लक्षण अलग/मिलेजुले हो सकते हैं।

कार्डियक अरेस्ट के संकेत: अचानक बेहोशी, सांस का अचानक रुक जाना, धड़कन/नब्ज़ न मिलना व्यक्ति जवाब नहीं दे रहा हो। ऐसे में इलाज मिनटों में होनी चाहिए।

आपात स्थिति में क्या करें —
जब शक हो कि कार्डियक अरेस्ट हुआ है (व्यक्ति बेहोश है और सांस/नब्ज़ नहीं)
तुरंत इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें — स्थानीय आपातकालीन सेवा। कॉल करते समय स्पष्ट बताएं कि व्यक्ति बेहोश है और श्वास/नब्ज़ नहीं मिल रही।

सीधा सीधा छाती पर दबाकर (Chest compressions/CPR) शुरू करें — बिना देरी के: हथेलियां छाती के बीच (स्तनों के बीच) रखें और कड़े-से-कड़े 100–120 बार/मिनट की दर से 5–6 सेमी गहराई तक दबाएँ। (यदि आपने रेस्क्यू ब्रिदिंग का प्रशिक्षण नहीं लिया है तो भी केवल छाती के कम्प्रेशन  Hands-Only CPR अत्यंत उपयोगी हैं)। तुरंत उच्च गुणवत्ता वाली CPR शुरू करने से जीवित रहने की संभावना दोगुनी या तिगुनी तक बढ़ सकती है।

यदि AED (ऑटोमैटिक एक्सटर्नल डेफिब्रिलेटर) उपलब्ध हो तो उपयोग करें AED के निर्देश सुनें और जितनी जल्दी हो सके शॉक दें यदि मशीन निर्देश दे। AED और CPR मिलकर कार्डियक अरेस्ट में सर्वाइवल की सबसे प्रभावी चेन बनाते हैं। महत्वपूर्ण: CPR और AED का प्रशिक्षण अवश्य लें — पर प्रशिक्षित न होने पर भी हाथ-मात्र दबाकर CPR करना बेहतर है बजाय इंतज़ार करने के।

जब शक हो कि हार्ट अटैक चल रहा है (लक्षण जैसे छाती दर्द, सांस फूलना)
शीघ्र इमरजेंसी सेवाओं को कॉल करें — व्यक्ति को आत्म-सहायता के लिए अकेला न छोड़ें।
उसे आराम से बैठा रखें — झुकाकर या आधा बैठा हुआ रखें; लेटाने से पहले डॉक्टर का मार्गदर्शन बेहतर है।

यदि उपलब्ध हो और व्यक्ति को एलर्जी न हो तो एस्पिरिन 300 mg चबाकर देने पर विचार करें (वयस्कों के लिए, और डॉक्टर/प्रोटोकॉल के अनुसार) — यह खून को पतला कर रक्त प्रवाह में मदद कर सकता है; पर बच्चे/गर्भवती या एस्पिरिन एलर्जी वाले को लागू न करें। (स्थानीय प्राथमिकता के अनुसार निर्देश बदल सकते हैं—यदि शंका हो तो आपातकालीन सेवा की सलाह लें)।

यदि व्यक्ति बेहोश हो जाए और न सांस ले रहा हो कार्डियक अरेस्ट मानकर CPR शुरू करें। (यानी हार्ट अटैक की स्थिति में भी अगर हृदय रुक जाए तो वही कार्डियक अरेस्ट प्रोटोकॉल लागू होगा)।

क्यों त्वरित कार्रवाई मायने रखती है?
अमेरिकी दिल संस्थान और बड़े रिसर्च-रिपोर्ट बताते हैं कि तुरंत और प्रभावी बाईस्टैंडर CPR मिलने पर कार्डियक अरेस्ट के रोगी की जीवित रहने की संभावना 2–3 गुना तक बढ़ सकती है। इसलिए समुदाय स्तर पर CPR-प्रशिक्षण और AED की उपलब्धता सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता होनी चाहिए।

रोकथाम और लंबी अवधि के कदम
• हृदय रोग के जोखिम (उच्च रक्तचाप, डायबिटीज़, धूम्रपान, अस्वस्थ आहार, निष्क्रिय जीवनशैली, उच्च कोलेस्ट्रॉल) कम करें — नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह लें।
• परिवार में अचानक हृदय रोग का इतिहास हो तो कार्डियक स्क्रीनिंग (ECG, इको) पर विचार करें।
• विद्यालयों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर CPR प्रशिक्षण तथा AED रखवाना बढ़ाएं  यह आपातकाल के समय जिंदगियां बचाते हैं।

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट अलग प्रक्रियाएं हैं, पर दोनों ही जीवन-धमकाने वाली घटनाएं हो सकती हैं। पहचानने की समझ और तुरंत, सही कदम—इमरजेंसी कॉल, CPR, AED और प्राथमिक उपचार—जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

समाज में प्रशिक्षण, सार्वजनिक AED और आपातकालीन तत्परता बढ़ाकर हम हजारों जीवन बचा सकते हैं। जानकारी देना ही पहला कदम है; अगला कदम प्रशिक्षण और अमल करना होना चाहिए।