Faridabad/Alive News: सूरजकुंड की वादियों में आयोजित 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय ‘आत्मनिर्भर’ शिल्प मेले में हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मेले में दिल्ली के प्रख्यात शिल्पकार एवं राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बालकिशन की स्टॉल नंबर 142 पर्यटकों के बीच विशेष आकर्षण बनी हुई है।
बालकिशन की स्टॉल पर भगवान की अत्यंत सुंदर, सजीव और बारीक नक्काशी वाली पीतल की मूर्तियां प्रदर्शित की गई हैं, जिनकी कीमत 200 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक है। उनकी कलाकृतियां शुद्धता, सौंदर्य और उत्कृष्ट कारीगरी के लिए जानी जाती हैं, जिसके चलते बड़ी संख्या में देश-विदेश से आए पर्यटक उनकी स्टॉल पर पहुंच रहे हैं।
दिल्ली से आए शिल्पकार बालकिशन ने बताया कि उनका परिवार पिछले चार पीढ़ियों से पीतल की मूर्तियां बनाने के कार्य से जुड़ा हुआ है और वे स्वयं पिछले 38 वर्षों से निरंतर सूरजकुंड मेले का हिस्सा बनते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मूर्तियों में केवल धातु नहीं, बल्कि चार पीढ़ियों का अनुभव, साधना और श्रद्धा समाहित है। उनके अनुसार सूरजकुंड मेला केवल व्यापार का मंच नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का उत्सव है।
गौरतलब है कि बालकिशन को उनकी असाधारण कला और समर्पण के लिए भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल) द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। मेले में आने वाले पर्यटक न केवल उनकी मूर्तियों की खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि उनकी कला यात्रा और अनुभवों को जानने में भी गहरी रुचि दिखा रहे हैं।

