Delhi/Alive News: बांग्लादेशी आर्मी के चीफ जनरल वाकर-उज-जमान का झुकाव अब कट्टरपंथी इस्लामी दलों की ओर देखा जा रहा है। जिनमें जमात-ए-इस्लामी, इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश, खिलाफत मजलिस, मुत्ताहिदे मजलिस-ए-अमल, और तंजीमुल उलेमा जैसे दल शामिल हैं।
ये सभी मिलकर एक कट्टरपंथी गठबंधन के रूप में उभर रहे हैं और एकजुट होकर प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन प्रणाली (मत प्रतिशत आधारित सीट बंटवारा) की मांग कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह मांग नहीं मानी गई तो वे चुनाव बहिष्कार का रास्ता अपनाएंगे।
मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी अंदरूनी चुनौतियों से जूझ रही है। पार्टी अब तक उम्मीदवार तय नहीं कर पाई है और हर सीट पर कई दावेदारों के चलते अंतर्विरोध गहराते जा रहे हैं। ऐसे में नेता तारीक रहमान की संभावित वापसी को पार्टी संकट से उत्थान की अंतिम उम्मीद मान रही है।
प्रस्तावित चुनावी व्यवस्था को लेकर बीएनपी में ही मतभेद:
चीफ एडवाइजर के नेतृत्व में राष्ट्रीय सहमति आयोग व संविधान सुधार आयोग ने दो सदन वाली संसद की सिफारिश की है। निचले सदन में 400 सीटें और चुनाव पहले की तरह फर्स्ट पास्ट द पोस्ट प्रणाली से होंगे।
ऊपरी सदन में 100 सीटें होंगी, जो निचले सदन के चुनाव में पार्टियों को प्राप्त वोट प्रतिशत के आधार पर तय की जाएंगी। इस पर कट्टरपंथी गठबंधन सहमत हैं, लेकिन बीएरपी इन 3 मुद्दों पर असहमत है।

