March 7, 2026

हड़ताल के बीच स्विगी-जोमैटो का बड़ा ऐलान, पीक ऑवर्स में 150 तक इंसेंटिव; आज फूड डिलीवरी प्रभावित हो सकती है

Delhi/Alive News: देशभर में गिग वर्कर्स यानी फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी पार्टनर्स की हड़ताल के बीच स्विगी और जोमैटो ने ज्यादा इंसेंटिव देने का ऐलान किया है। कंपनियों ने डिलीवरी पार्टनर्स को मैसेज भेजकर बताया है कि पीक ऑवर्स में प्रति ऑर्डर ज्यादा भुगतान किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग काम पर आएं।

जोमैटो ने कहा है कि शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक पीक ऑवर्स में हर ऑर्डर पर 120 से 150 रुपये तक का पेआउट मिलेगा। इसके अलावा, दिनभर में ऑर्डर की संख्या और उपलब्धता के आधार पर 3,000 रुपये तक कमाई का वादा किया गया है। वहीं स्विगी ने बताया है कि डिलीवरी पार्टनर्स 31 दिसंबर और 1 जनवरी को मिलाकर 10,000 रुपये तक कमा सकते हैं। न्यू ईयर ईव पर पीक ऑवर्स में 2,000 रुपये तक की कमाई संभव बताई गई है।

1 लाख तक वर्कर्स हो सकते हैं हड़ताल में शामिल
31 दिसंबर को देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल में करीब 1 लाख डिलीवरी पार्टनर्स शामिल हो सकते हैं। इसके चलते फूड डिलीवरी और ऑनलाइन ग्रॉसरी सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। यूनियन का आरोप है कि स्विगी, जोमैटो जैसी कंपनियां उनका शोषण कर रही हैं और उन्हें बुनियादी कानूनी अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं। यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। इससे पहले 25 दिसंबर को हुई सांकेतिक हड़ताल में करीब 40,000 डिलीवरी वर्कर्स शामिल हुए थे।डिलीवरी पार्टनर्स और राइडर्स की हड़ताल के पीछे कई वजहें हैं। यूनियन नेताओं के मुताबिक प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

सामाजिक सुरक्षा की कमी: पेंशन, हेल्थ इंश्योरेंस और पीएफ जैसी सुविधाएं नहीं मिल रहीं।

कम होती कमाई: पहले प्रति ऑर्डर 40–60 रुपये मिलते थे, जो अब घटकर 15–25 रुपये रह गए हैं।

खराब वर्किंग कंडीशन: 10–12 मिनट में डिलीवरी का दबाव, जिससे हादसों का खतरा बढ़ता है।

आईडी ब्लॉक करने की शिकायत: बिना वजह और बिना सूचना के अकाउंट बंद कर दिए जाते हैं।

कानूनी दर्जा: वर्कर्स चाहते हैं कि उन्हें ‘पार्टनर’ नहीं, बल्कि कर्मचारी माना जाए।

दिल्ली-एनसीआर, मुंबई समेत बड़े शहरों में ज्यादा असर
यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) ने बुलाई है। इसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली-एनसीआर, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के संगठनों का समर्थन मिला है। ऐसे में इन इलाकों में डिलीवरी सेवाएं ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं।

यूनियन नेताओं का दावा है कि एक लाख से ज्यादा वर्कर्स या तो ऐप से लॉग-आउट रहेंगे या बहुत कम काम करेंगे। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि साल के अंत में कमाई ज्यादा होने के कारण कुछ डिलीवरी पार्टनर्स हड़ताल के बावजूद काम कर सकते हैं।

फूड डिलीवरी पर असर ज्यादा, ई-कॉमर्स पर कम
विशेषज्ञों के अनुसार हड़ताल का सबसे ज्यादा असर फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर पड़ेगा। ई-कॉमर्स कंपनियों पर असर कम रहने की उम्मीद है, क्योंकि उनके पास मजबूत बैकअप डिलीवरी सिस्टम होता है।