Faridabad/Alive News: क्लास में बच्चों को चिढ़ाना, उनका मजाक उड़ाना या बार-बार परेशान करना कई बार शिक्षकों की नजरों से छिप जाता है। ऐसे मामलों की पहचान करने के लिए सेक्टर-14 स्थित डीएवी स्कूल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद ली जा रही है। स्कूल में शुरू किए गए एआई आधारित बुलिंग डिकोडर के पायलट प्रोजेक्ट में पांच महीने के दौरान बुलिंग की घटनाओं में 54 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया। इस पहल के जरिए क्लास में विद्यार्थियों के व्यवहार को समझने और समय रहते हस्तक्षेप करने पर जोर दिया जा रहा है।
कैमरों से गतिविधियों और संवाद पर नजर
पायलट प्रोजेक्ट के तहत स्कूल की चुनिंदा कक्षाओं में ऑडियो-विजुअल कैमरे लगाए गए। इनके माध्यम से विद्यार्थियों की गतिविधियों और आपसी संवाद का आकलन किया गया, ताकि मौखिक रूप से परेशान करने और बुलिंग से जुड़ी घटनाओं की पहचान की जा सके। इसका उद्देश्य ऐसी स्थितियों को सामने लाना है, जिनकी जानकारी कई बार शिक्षक या स्कूल प्रबंधन तक नहीं पहुंच पाती।
काउंसलिंग से बच्चों को जोड़ने की पहल
स्कूल में बुलिंग के दुष्परिणामों को लेकर कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। बुलिंग करने वाले विद्यार्थियों और इससे प्रभावित बच्चों की काउंसलिंग की गई। साथ ही, विद्यार्थियों के बीच काउंसल सदस्यों को भी चुना गया, ताकि बच्चे बिना झिझक अपनी परेशानी साझा कर सकें। शिक्षकों से सीधे बात करने में संकोच करने वाले विद्यार्थियों को इनकी मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
वर्जन
स्कूल में बुलिंग की घटनाओं को समय रहते पहचानने और रोकने के लिए एआई की मदद ली जा रही है। इसके साथ विद्यार्थियों की काउंसलिंग और जागरूकता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के पांच महीने में बुलिंग की घटनाओं में 54 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया है।
डॉ. अनीता गौतम, प्रिंसिपल, डीएवी स्कूल, सेक्टर-14

