March 7, 2026

चीनी सैन्य अफसर का 35 साल बाद हुआ वीडियो लीक

Delhi/Alive News: चीन में 1989 के थियानमेन स्क्वायर पर लोकतंत्र की मांग करने वाले हजारों छात्रों को मरवा दिया गया था। इस आंदोलन से जुड़ा एक सीक्रेट वीडियो 35 साल बाद सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई जाती है कि इस दौरान 10 हजार छात्रों को टैंक से कुचल दिया गया था। हालांकि आधिकारिक आंकड़ा कभी सामने नहीं आया।

यह जो सीक्रेट वीडियो सामने आया है वो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जनरल शू छिनशियान के कोर्ट मार्शल का है। जनरल शू बताते हैं कि उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने और सैन्य कार्रवाई का आदेश मानने से इनकार क्यों किया था।

6 घंटे के वीडियो में जनरल शू कहते हैं कि थियानमेन आंदोलन एक राजनीतिक जन आंदोलन था। इसे बातचीत और राजनीतिक तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए था। उन्होंने साफ कहा कि वे इतिहास में अपराधी नहीं बनना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अपने जवानों को छात्रों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया।

उस वक्त सरकार ने जनरल शू को बीजिंग भेजकर मार्शल लॉ लागू करने और करीब 15 हजार सैनिकों को तैनात करने का आदेश दिया था। हालांकि, उन्होंने यह आदेश मानने से इनकार कर दिया।

इसके बाद चीनी सरकार ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की। सरकार ने जनरल शू को कम्युनिस्ट पार्टी से बाहर कर दिया था, साथ ही 5 साल की सजा सुनाई।

पिछले महीने ऑनलाइन लीक हुआ वीडियो

जनरल शू छिनशियान के कोर्ट मार्शल का यह वीडियो पहली बार पिछले महीने ऑनलाइन लीक हुआ। इसके सोर्स की जानकारी नहीं है। इसे यूट्यूब पर 13 लाख से ज्यादा बार देखा चुका है।

थियानमेन आंदोलन के इतिहासकार वू रेनहुआ ने इसे शेयर किया है। रेनहुआ कहना है कि यह वीडियो उस दौर की अंदरूनी सैन्य असहमति का सबसे अहम गवाह है। लीक वीडियो दिखाता है कि उस समय चीन की सेना के भीतर भी फैसलों को लेकर मतभेद थे।

1989 में थियानमेन स्क्वायर और उसके आसपास सेना की कार्रवाई में कई हजार लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जाती है। यह घटना आज भी चीन में सबसे ज्यादा सेंसर किए जाने वाले मुद्दों में शामिल है।

35 साल पहले थियानमेन स्क्वायर पर क्या हुआ था

चीन की राजधानी बीजिंग का थियानमेन स्क्वायर साल 1989 में एक बड़े जनआंदोलन का केंद्र बना। यह आंदोलन छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुआ, जो बाद में आम नागरिकों तक फैल गया। प्रदर्शनकारी सरकार से राजनीतिक सुधार, भ्रष्टाचार पर रोक और अभिव्यक्ति की आजादी की मांग कर रहे थे।

आंदोलन की शुरुआत अप्रैल 1989 में सुधारवादी नेता हू याओबांग की मौत के बाद हुई। उनकी मौत की पीछे दिल का दौरा पड़ने को वजह बताया गया।

हू याओबांग को राजनीतिक सुधारों का समर्थक माना जाता था। उनकी मौत के बाद छात्र बीजिंग में इकट्ठा होने लगे और सरकार से भ्रष्टाचार खत्म करने, अभिव्यक्ति की आजादी, लोकतांत्रिक सुधार जैसी मांगें करने लगे।

देखते ही देखते हजारों छात्र और नागरिक थियानमेन स्क्वायर पर जमा हो गए। 13 मई से प्रदर्शन शुरू हो गया जो कई हफ्तों तक शांतिपूर्ण रहा।

सरकार ने मॉर्शल लॉ लगाकर नरसंहार किया

चीनी सरकार ने स्थिति बिगड़ती देख बीजिंग में मार्शल लॉ लागू कर दिया। 3 और 4 जून 1989 की रात पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को राजधानी में तैनात किया गया।

टैंकों और हथियारबंद सैनिकों ने थियानमेन स्क्वायर और उसके आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों और आम लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी की।

घटना के बाद एक तस्वीर दुनियाभर में वायरल हुई। एक अकेला युवक टैंकों के सामने खड़ा होकर उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश करता है।

इस व्यक्ति की पहचान आज तक सामने नहीं आई, लेकिन वह साहस और विरोध का वैश्विक प्रतीक बन गया।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक घटना में सिर्फ कुछ सौ लोग मारे गए। लेकिन BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना में मारे जाने वालों का आंकड़ा 10 हजार के पार था।