March 7, 2026

अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत में 6 साल की बच्ची की 45 साल के व्यक्ति से की शादी

Delhi/Alive News: अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत में 6 साल की एक बच्ची की शादी 45 साल के एक व्यक्ति से कर दी गई। अमेरिका स्थित अफगान आउटलेट की रिपोर्ट के मुताबिक शादी की तस्वीरें सामने आने के बाद खुद तालिबान अधिकारी हैरान रह गए और बच्ची को उसके ससुराल ले जाने से रोक दिया। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जब वह 9 साल की हो जाएगी, तब उसे पति के घर भेजा जा सकता है।

इसके बाद पुलिस ने बच्ची के पिता और दूल्हे को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन अब तक किसी पर आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। हश्त-ए-सुबह डेली के मुताबिक दूल्हे की पहले से दो पत्नियां है। उसने बच्ची के परिवार को पैसे देकर यह रिश्ता तय करवाया। शादी हेलमंद के मर्जा जिले में हुई।

तालिबान की वापसी के बाद बाल-विवाह के केस बढ़े

तालिबान के 2021 में दोबारा सत्ता में आने के बाद, देश में न सिर्फ बाल विवाह की घटनाएं बढ़ी हैं, बल्कि उन्हें लेकर सामाजिक सहमति भी बनती जा रही है। लड़कियों की शिक्षा और काम पर पाबंदी के चलते कई परिवार बेटियों को बोझ मानकर जल्दी ब्याह दे रहे हैं।

युएन वुमेन की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के महिला-विरोधी कानूनों के चलते देश में बाल विवाह में 25% और किशोरियों के गर्भधारण में 45% की वृद्धि हुई है।

बाल विवाह के पीछे सामाजिक मान्यताएं और कुप्रथाएं

अफगान समाज में अक्सर लड़कियों को बचपन में ही नामकरण प्रथा के तहत किसी रिश्तेदार से मंगनी कर दी जाती है। इसे पारिवारिक संपत्ति की तरह देखा जाता है।

कई इलाकों में ‘वलवर’ यानी दहेज के रूप में पैसा लेकर लड़कियों की शादी तय होती है। यह रकम लड़की की खूबसूरती, सेहत और शिक्षा के स्तर के आधार पर तय होती है।

द अफगान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उरुजगान की एक महिला अमीरी ने बताया कि उन्होंने अपनी 14 वर्षीय बेटी की शादी 27 साल के पुरुष से 3 लाख अफगानी में कर दी। महिला ने बताया कि उनकी बेटी बहुत छोटी है, लेकिन घर में खाने को कुछ नहीं था, यही रास्ता बचा था।

अफगान समाज में ‘बाद’ नाम की प्रथा के तहत खून-खराबे वाले झगड़ों को सुलझाने के लिए लड़कियों को दुश्मन परिवारों को सौंप दिया जाता है। एक बार सौंपे जाने के बाद लड़की अपने पति के परिवार की इज्जत (नमूस) बन जाती है।

तालिबान नेताओं के खिलाफ आईसीसी ने गिरफ्तारी वारंट जारी किए

इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने 8 जुलाई को तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबातुल्लाह अखुंदजादा और अफगानिस्तान के चीफ जस्टिस अब्दुल हकीम हक्कानी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं।

इन दोनों पर अफगान महिलाओं, लड़कियों और तालिबान की कठोर जेंडर नीतियों का विरोध करने वालों पर अत्याचार करने का आरोप है। ये वारंट मानवता के खिलाफ अपराधों के तहत जारी किए गए हैं।

कोर्ट का कहना है कि इनके खिलाफ “क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी” के पर्याप्त आधार हैं।

यह पहली बार है जब आईसीसी ने तालिबान के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ ऐसा कोई कानूनी कदम उठाया है। कोर्ट ने कहा कि15 अगस्त 2021 से, जब तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता संभाली, तब से लेकर 20 जनवरी 2025 तक महिलाओं और लड़कियों पर कई गंभीर अपराध किए गए। इनमें हत्या, कैद, बलात्कार, यातना और जबरन गायब करना शामिल हैं। ये ज़ुल्म सिर्फ लिंग के आधार पर ही नहीं बल्कि तालिबान विरोधी विचार रखने वालों पर भी हुए।