November 5, 2026

विजिलेंस अधिकारी बनकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दी नौकरी से हटवाने की धमकी, गिरफ्तार

Faridabad/Alive News: बीके अस्पताल में करीब 50 लाख रुपये के डीजल घोटाले की जांच के बीच एक व्यक्ति ने खुद को सतर्कता अधिकारी बताकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जयंत आहूजा पर रौब जमाने की कोशिश की। आरोपी ने उन्हें नौकरी से हटवाने और नौकरी खा जाने तक की धमकी दी। हालांकि, बातचीत के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उसकी पहचान पर शक हो गया। उन्होंने डायल-112 पर सूचना देकर पुलिस बुला ली। पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया। उसकी पहचान उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी राजिंदर सिंह के रूप में हुई है।

कार्यालय पहुंचकर दिखाई अधिकारी होने की धौंस

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जयंत आहूजा के मुताबिक, आरोपी 4 अक्टूबर को उनके कार्यालय पहुंचा था। उसने खुद को सतर्कता अधिकारी बताते हुए अस्पताल के अधिकारियों और कर्मचारियों पर रौब जमाना शुरू कर दिया। इस दौरान उसने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को धमकी देते हुए कहा कि वह उनकी नौकरी खा जाएगा और उन्हें पद से हटवा देगा।

राष्ट्रपति भवन से नियुक्त होने का किया दावा

आरोपी ने दावा किया कि उसे राष्ट्रपति भवन में कार्यरत डॉ. विजेंद्र सिंह, फील्ड मार्शल ने नियुक्त किया है। उसने कहा कि वह फरीदाबाद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एंबुलेंस के तेल घोटाले की जांच करने और इससे जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल करने आया है।

शक होने पर पुलिस को दी सूचना

आरोपी के व्यवहार और बातचीत के तरीके से मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उसकी पहचान पर संदेह हुआ। उन्हें आशंका हुई कि वह फर्जी अधिकारी बनकर अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद उन्होंने डायल-112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को पकड़कर एनआईटी नंबर-3 चौकी ले गई।

डीजल घोटाले की जांच का फायदा उठाने की कोशिश

बीके अस्पताल में करीब 50 लाख रुपये के डीजल घोटाले की जांच चल रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अनुसार, इस मामले की जांच मुख्यालय की टीम कर रही है। आशंका है कि आरोपी ने इसी जांच का हवाला देकर खुद को सतर्कता अधिकारी बताया और अस्पताल के अधिकारियों व कर्मचारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की।

बुलंदशहर का रहने वाला है आरोपी

एनआईटी नंबर-3 चौकी प्रभारी मनोज के मुताबिक, आरोपी की पहचान राजिंदर सिंह के रूप में हुई है। वह उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का रहने वाला है। शुरुआती जांच में उसके अधिकारी होने का दावा फर्जी पाया गया है। पुलिस के अनुसार, अस्पताल के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी ने उसे पैसे नहीं दिए। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले की जांच कर रही है।