October 7, 2026

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से गर्भाशय को रखा सुरक्षित, 48 घंटे में अस्पताल से मिली छुट्टी

Faridabad/Alive News: अमेरिका की 32 वर्षीय महिला लंबे समय से अत्यधिक मासिक रक्तस्राव और पेट दर्द से परेशान थी। जांच में उसके गर्भाशय में दो बड़ी फाइब्रॉइड मिलीं, जिनका कुल वजन करीब 2 किलो था। इलाज के लिए महिला अमेरिका से फरीदाबाद पहुंची। एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में डॉक्टरों ने बिना बड़ा चीरा लगाए लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से दोनों फाइब्रॉइड निकाल दीं। इस दौरान गर्भाशय को सुरक्षित रखा गया।

डॉक्टरों के अनुसार, महिला का गर्भाशय करीब 30 सप्ताह की गर्भावस्था के आकार तक बढ़ गया था। फाइब्रॉइड के कारण उसे काफी समय से ज्यादा रक्तस्राव हो रहा था। इसके चलते उसका हीमोग्लोबिन घटकर 5.6 ग्राम तक पहुंच गया था। सर्जरी से पहले उसे रक्त चढ़ाकर स्थिति सामान्य की गई।

छोटे चीरे से निकाली गईं बड़ी गांठें

ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी की डायरेक्टर एवं हेड डॉ. प्रीति चौधरी के निर्देशन में लैप्रोस्कोपिक मायोमेक्टॉमी की गई। डॉक्टरों ने पेट में छोटे-छोटे चीरे लगाकर की-होल तकनीक से दोनों फाइब्रॉइड निकालीं। फाइब्रॉइड का आकार काफी बड़ा होने और गर्भाशय के बढ़े हुए आकार के कारण सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। इसके बावजूद पारंपरिक तरीके से बड़ा चीरा लगाए बिना ऑपरेशन पूरा किया गया।

48 घंटे में अस्पताल से छुट्टी

सर्जरी के अगले दिन महिला चलने लगी और उसकी रिकवरी भी सामान्य रही। करीब 48 घंटे बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी के दौरान गर्भाशय को सुरक्षित रखने से भविष्य में महिला की प्रजनन क्षमता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। फाइब्रॉइड गर्भाशय की मांसपेशियों में बनने वाली गैर-कैंसरयुक्त गांठें होती हैं।