September 22, 2026

प्राइवेट यूनिवर्सिटीज पर सुप्रीम कोर्ट की चाबुक, शिक्षा के नाम पर मुनाफा कमाने वालों की खैर नहीं

सुप्रीम कोर्ट में निजी विश्वविद्यालयों की फीस और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ा मामला

New Delhi/Alive News: प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को मुनाफा कमाने वाली संस्था के रूप में संचालित नहीं किया जा सकता है. बेंच ने देशभर के निजी विश्वविद्यालयों को पिछले पांच सालों के लेखा-परीक्षित वित्तीय रिकॉर्ड, फीस ढांचे, धन के उपयोग, अतिरिक्त धनराशि के निवेश और शिक्षा से सीधे जुड़े ना होने वाले लोगों को किए गए भुगतान सहित कई अहम जानकारियां सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है.  जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों के पास संस्थान के सुचारू संचालन और संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन के लिए उचित वित्तीय भंडार हो सकता है, लेकिन शिक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल शिक्षा से असंबंधित उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता. 

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हम यह स्पष्ट करते हैं कि किसी भी निजी विश्वविद्यालय को मुनाफा कमाने वाली संस्था के रूप में चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. उसे एक उद्देश्य की पूर्ति करनी होगी और उसके पास कुछ वित्तीय गुंजाइश होनी चाहिए, ताकि संस्थान के वित्तीय संसाधनों का जिम्मेदारी से प्रबंधन हो सके और शिक्षण तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों को उचित पारिश्रमिक दिया जा सके.

कोर्ट ने मांगे सभी रिकॉर्ड

ये मामला नोएडा स्थित एमिटी विश्वविद्यालय से जुड़े एक छात्र की शिकायत से शुरू हुआ था. हालांकि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले का दायरा बढ़ाते हुए कहा कि व्यापक जनहित में देशभर के निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, नियमन और उन्हें मिलने वाले लाभों की जांच करना आवश्यक है. अदालत ने निजी विश्वविद्यालयों से पिछले पांच साल के लेखा-परीक्षित वित्तीय रिकॉर्ड मांगे हैं. इनमें संस्थान की अर्जित और खर्च की गई धनराशि, शिक्षा से सीधे जुड़े नहीं होने वाले व्यक्तियों को किए गए भुगतान, बची हुई धनराशि और उसके निवेश का पूरा विवरण शामिल होगा. 

सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों से ये बताने को कहा है कि उन्हें केंद्र या राज्य सरकारों से जमीन के आवंटन, कानूनों में छूट या किसी अन्य विशेष सुविधा के रूप में क्या-क्या लाभ मिला. इसके अलावा प्रत्येक पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों के प्रवेश की पूरी प्रक्रिया, प्रवेश की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी, प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा कराने और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की व्यवस्था तथा धन के प्रबंधन में विश्वविद्यालय के प्रबंधन की भूमिका की जानकारी भी मांगी गई है 

छात्रों की फीस की जानकारी भी देनी होगी

अदालत ने विश्वविद्यालयों से प्रवेश के समय और पाठ्यक्रम के दौरान छात्रों से वसूली जाने वाली पूरी फीस का विवरण मांगा है. इसके अलावा विकास शुल्क, विशेष कार्यक्रमों के नाम पर लिए जाने वाले शुल्क या किसी अन्य नाम से की जाने वाली वसूली की जानकारी भी देनी होगी. विश्वविद्यालयों को ये भी बताना होगा कि अतिरिक्त बची धनराशि का क्या किया जाता है और उसे कहां निवेश किया गया है. 

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया, उनके वेतन और अन्य सुविधाओं तथा भुगतान की व्यवस्था का पूरा विवरण मांगा है. विश्वविद्यालयों को ये भी बताना होगा कि शिक्षकों की सेवा शर्तें क्या हैं और कक्षाएं आवंटित करने का अधिकार किस अधिकारी के पास है. जनवरी 2025 से अब तक प्रत्येक शिक्षक को कितनी क्लास आवंटित की गईं, वास्तव में कितनी कक्षाएं उन्होंने लीं और यदि किसी शिक्षक ने कक्षाएं नहीं लीं तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक क्या व्यवस्था की गई, इसका भी विवरण देना होगा. 

छात्रों की शिकायतों पर क्या हुआ?

अदालत ने विश्वविद्यालयों में छात्रों की शिकायतों के निवारण की व्यवस्था की जानकारी भी मांगी है. विश्वविद्यालयों को शिकायत निवारण समितियों की संरचना, उनके अधिकार क्षेत्र, पिछले तीन वर्षों में प्राप्त शिकायतों की संख्या, शिकायतों की प्रकृति, उन पर हुई कार्रवाई और शिकायतों के निपटारे में लगे समय का पूरा ब्योरा देना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने उन निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े अस्पतालों की जानकारी भी मांगी है, जहां चिकित्सा शिक्षा संचालित होती है. अदालत ने विश्वविद्यालय और अस्पताल के बीच संबंध और अस्पताल की भूमिका का विवरण देने को कहा है. 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे संबंधित विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से जानकारी प्राप्त करने के बाद अपने मुख्य सचिवों के माध्यम से हलफनामा दाखिल करें. ये हलफनामा 17 सितंबर 2026 के आदेश की तारीख से छह सप्ताह के भीतर दाखिल करना होगा. इसकी एक प्रति स्कूल निगरानी समिति के अध्यक्ष डॉ. आरएम शर्मा को भी देनी होगी. मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी.