June 13, 2026

दिल्ली में महंगी होगी बिजली, जून के बिल में बढ़ेगा फ्यूल सरचार्ज

दिल्ली में बढ़ते बिजली बिल और फ्यूल सरचार्ज को लेकर प्रतीकात्मक तस्वीर

New Delhi/Alive News: दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को जून महीने के बिजली बिल में अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ सकता है। दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों को फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) की सीमा बढ़ाने की अनुमति दे दी है।

हालांकि 400 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर नहीं पड़ेगा। सबसे ज्यादा प्रभाव व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है।

कितनी बढ़ी सरचार्ज की सीमा?

अब तक बिजली कंपनियां अधिकतम 10 प्रतिशत तक FPPAS वसूल सकती थीं। DERC ने इसे बढ़ाकर करीब 16 से 17 प्रतिशत तक करने की अनुमति दे दी है।

दिल्ली में तीन प्रमुख बिजली वितरण कंपनियां काम करती हैं और उनके उपभोक्ताओं पर इसका असर अलग-अलग होगा।

  • टाटा पावर के उपभोक्ताओं के बिल में लगभग 1 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
  • BSES क्षेत्र के उपभोक्ताओं को 2.5 से 3.5 प्रतिशत तक अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।
  • मार्च महीने के बकाया सरचार्ज की वसूली भी जून के बिल में की जा सकती है।

व्यापारियों और उद्योगों ने जताई चिंता

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर इस फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे करोलबाग जैसे व्यावसायिक इलाकों में दुकानदारों के बिजली बिल में हजारों रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में पहले से ही कमर्शियल और औद्योगिक बिजली दरें हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुकाबले अधिक हैं। ऐसे में बिजली और महंगी होने से व्यापारियों तथा फैक्ट्री मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

हरियाणा और यूपी की ओर जा सकती हैं फैक्ट्रियां

व्यापारिक संगठनों का मानना है कि बिजली की बढ़ती लागत के कारण कुछ उद्योग दिल्ली से हरियाणा और उत्तर प्रदेश की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। वहां बिजली दरें और श्रम लागत अपेक्षाकृत कम होने से उत्पादन लागत घटती है।

यूपी के बाद दिल्ली में बढ़ा फ्यूल सरचार्ज

हाल ही में उत्तर प्रदेश में भी बिजली पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया गया था। अब दिल्ली में भी बिजली कंपनियों को सरचार्ज बढ़ाने की अनुमति मिलने के बाद उपभोक्ताओं, खासकर व्यापारिक और औद्योगिक वर्ग के बीच चिंता बढ़ गई है।

आने वाले महीनों में इसका असर बाजार, उत्पादन लागत और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।