June 6, 2026

राम नवमी यज्ञ में ‘सजन भाव’ अपनाने का दिया संदेश

Faridabad/Alive News: सतयुग दर्शन वसुन्धरा में आयोजित राम नवमी यज्ञ महोत्सव के द्वितीय दिवस पर ‘भाव-स्वभाव परिवर्तन क्रांति’ के अंतर्गत श्रद्धालुओं को ‘सजन भाव’ की महिमा विस्तार से समझाई गई। कार्यक्रम में बताया गया कि सजन वह श्रेष्ठ व्यक्ति है, जो जनहित को समझने वाला, मानव धर्म के अनुरूप आचरण करने वाला तथा विचारशील, बुद्धिमान और विद्वान होता है।

वक्ताओं ने कहा कि सच्चे सजन की वाणी में मधुरता होती है और वह विषय-विकारों से दूर रहकर जितेन्द्रिय एवं निर्विकारी जीवन जीता है। सजन भाव को जीवन में अपनाने से मनुष्य का हृदय निरंतर निर्विकार अवस्था में स्थित रहता है, जो अमरता की ओर अग्रसर होने जैसी महान उपलब्धि है।

इस दौरान श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा गया कि शास्त्रों में बताए गए मार्ग को अपनाकर और निष्काम भाव से सत्य धर्म पर चलकर मनुष्य मृत्युलोक पर विजय प्राप्त कर सकता है। “सजनों सजन शब्द चलाओ जित्तो मृतलोक नूं” जैसे वचनों के माध्यम से सजन भाव के महत्व को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम में सजन भाव को व्यवहारिक जीवन में उतारने की विधि भी बताई गई। इसके तहत कहा गया कि सबसे पहले व्यक्ति को अपने संकल्प, इच्छा और इरादों को शुद्ध करना होगा। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से दूर रहते हुए प्रत्येक व्यक्ति को परिवार, समाज और समस्त संसार के प्रति सजनता का भाव रखना चाहिए तथा सभी को “सजन जी” कहकर संबोधित करने की आदत विकसित करनी चाहिए।

अंत में श्रद्धालुओं से आह्वान किया गया कि वे आत्मनिरीक्षण कर अपने भीतर की कमजोरियों को त्यागें और समभाव व समदृष्टि को अपनाएं। इस मार्ग पर चलकर मनुष्य आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और निर्विकार जीवन प्राप्त कर सकता है तथा जीवन के अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति में सफल हो सकता है।