Delhi/Alive News: अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का 14वां दिन है। इराक में अमेरिकी सेना का एक केसी-135 सैन्य विमान क्रैश हो गया है। इसके बाद इराक के एक शिया विद्रोही गुट ने दावा किया है कि विमान को उसी ने मार गिराया। इससे पहले 2 मार्च को कुवैत में फ्रेंडली फायरिंग में भी तीन अमेरिका विमान क्रैश हो गए थे।
‘इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक’ नाम के संगठन ने कहा कि उसके लड़ाकों ने पश्चिमी इराक में अमेरिकी विमान पर एयर डिफेंस सिस्टम से हमला किया, जिससे वह गिर गया। यह संगठन ईरान समर्थित कई गुटों का गठबंधन है।
हालांकि अमेरिकी सेना ने इस दावे को गलत बताया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक दो अमेरिकी विमानों से जुड़ी एक घटना हुई थी। इसमें एक विमान पश्चिमी इराक में क्रैश हो गया, जबकि दूसरा विमान सुरक्षित रूप से इजराइल में उतर गया।
वहीं, ब्रिटिश मीडिया द सन के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले में घायल होने के बाद ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं और कोमा में हैं।
लेबनान में जमीनी कार्रवाई करेगा इजराइल
इजराइल ने लेबनान में जमीनी सैन्य कार्रवाई शुरू करने का आदेश दे दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब लेबनान से लगातार रॉकेट और मिसाइल हमले हो रहे हैं और सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
इजराइली सेना का कहना है कि लेबनान में मौजूद ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह लगातार इजराइल के शहरों को निशाना बना रहा है। इसी को रोकने के लिए सेना को सीमा पार कर जमीनी ऑपरेशन शुरू करने की इजाजत दी गई है।
इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए यह कदम जरूरी है। उनके मुताबिक सेना का मकसद लेबनान के दक्षिणी हिस्से में मौजूद हिजबुल्लाह के ठिकानों को खत्म करना और इजराइल पर हो रहे हमलों को रोकना है।
जंग के बाद पहली बार होर्मुज से तेल लेकर मुंबई पहुंचा टैंकर
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई है। जंग शुरू होने के बाद गुरुवार को पहली बार होर्मुज स्ट्रेट से होकर एक तेल टैंकर सुरक्षित तरीके से मुंबई पहुंचा। इससे भारत में तेल की सप्लाई को लेकर जो चिंता थी, वह कुछ हद तक कम हो गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लाइबेरिया का झंडा लिए “सीलिन एक्सप्रेस” नाम का जहाज करीब 13.5 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर मुंबई पहुंचा। यह जहाज 28 फरवरी को रवाना हुआ था और होर्मुज के रास्ते भारत आया। जंग शुरू होने के बाद इस रास्ते से भारत आने वाला यह पहला बड़ा तेल टैंकर बताया जा रहा है।
जब जहाज होर्मुज के इलाके से गुजर रहा था, तब सुरक्षा कारणों से उसका AIS सिस्टम (जहाज की लोकेशन बताने वाला सिस्टम) बंद कर दिया गया था। इसे “डार्क मोड” कहा जाता है।
ऐसा इसलिए किया गया ताकि जहाज की लोकेशन किसी को पता न चल सके और वह सुरक्षित निकल सके। बाद में 10 मार्च के आसपास जहाज दुबई के पास फिर से ट्रैक पर दिखाई दिया और 12 मार्च को मुंबई के जवाहर द्वीप टर्मिनल पर पहुंच गया।

