Faridabad/Alive News: यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। बुधवार को हर घंटे जलस्तर चार से सात हजार क्यूसेक तक बढ़ता रहा। हथनीकुंड बैराज से तीन दिन पहले छोड़े गए तीन लाख 39 हजार क्यूसेक पानी में से बुधवार देर शाम तक लगभग ढाई लाख क्यूसेक पानी बहकर निकल गया। प्रशासनिक अधिकारी लगातार प्रभावित गांवों का दौरा कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
फसलों में पानी भरने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। अरूआ, मोहना, चांदपुर और शाहजहांपुर समेत कई गांवों तक पानी पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को अरूआ साहुपुरा खादर सहित 14 गांवों का दौरा कर ग्रामीणों की स्वास्थ्य स्थिति का जायजा लिया।
167 लोग राहत शिविरों में ठहराए गए
बाढ़ से प्रभावित बसंतपुर, इस्माइलपुर, साहुपुरा खादर और अरूआ के 167 लोगों को राहत शिविरों में ठहराया गया है। वहीं, 250 घर आंशिक रूप से जलमग्न हो गए हैं। एसडीआरएफ की 9 टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
उपायुक्त ने किए 15 गांवों का दौरा
पलवल के उपायुक्त हरीश कुमार ने मंगलवार को खादर क्षेत्र के 15 गांवों का दौरा किया और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिनके पास ठहरने की व्यवस्था नहीं है, वे प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत शिविरों में रह सकते हैं।
ग्रामीणों में पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता
बाढ़ से परेशान ग्रामीण सुरक्षित स्थान पर जाने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि वे घर छोड़ देंगे तो सामान और पशुओं की चोरी का खतरा है। कई ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और वे अपने पशुओं को लेकर असमंजस में हैं।
बुढ़िया नाला लबालब, रेनीवेल डूबे
बढ़ते जलस्तर के कारण 18 किलोमीटर लंबे बुढ़िया नाले में पानी लबालब हो गया है। एसडीओ राकेश कुमार ने बताया कि नाला कच्चा होने के कारण ज्यादा पानी सहन नहीं कर पा रहा है, फिलहाल अस्थायी समाधान किए जा रहे हैं। 1978 और 2023 के बाद अब इस वर्ष यमुना का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा है।
इसी बीच, बाढ़ के पानी में कंवारा और कबूलपुर के दो रेनीवेल डूब गए हैं, जिन्हें सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया है।

